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ये पंछी..

Nivedita Roy

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            श्वेत श्याम
        
                                                    
                            
काला सफ़ेद
इनमें कहाँ है
कोई रंग भेद ?
ना कोई देसी
ना कोई विदेशी
ना धर्म का अपमान
ना जात पात का विभाजन

पंख फैला कर
हवाओं का सामना
ज़मीन पर खाना
दरख़्त पर बसेरा
चहकता सवेरा
परों की परवान
और ऊँची उड़ान
आसमान की छत
ज़मीन की हद
समुंदर की रेत
पहाड़ों के पत्थर
यही बन जाते
कुर्सी और बिस्तर
कुछ सीख ले, ए इंसान !
तेरी सोच का दायरा
क्यों इतना कमतर ?
3 वर्ष पहले
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