श्वेता वसन ऽऽ तन ऽ, देवी तव ऽ सेवी पद ऽऽ
होइछी सुफल मन ऽऽ, मन के निवरनी - २
सर ऽ सीज ऽ चरण ऽऽ वरण ऽ करू पुरश्याम ऽऽ
तन ऽ मन ऽ धन ऽ करू जय माँ तू हरणी - २
स्फटीका के माला-पोथी वीणा भयंकर ऽ धारी
हंस असवारी तब ऽ चढ़त ऽ विहरणी - २
ज्ञानदा, विज्ञानंदा ,सुमनंदा ,परवानंदा हे
मिथिला के मनदा हे मिथिला निवरणी - २
हरि हर ऽ विधि नव ऽ निधि सब रिद्धि-सिद्धि
छत्री वासे जनिका परवाने मोदकरणी - २
तन हे त्रिलोचना से करू आघमोचना से
शारदे भवानी जय हे जय-जय माँ तू तरुणी - २