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घर में बुज़ुर्गों की ख़िदमत करने वाले, ना-गुज़ीर-हालात में निखर जाते हैं

Nishant Shukla

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ताश के मकाँ टूट कर बिखर जाते हैं
        
                                                    
                            
फ़रहत के लम्हे जल्द गुज़र जाते हैं

महफ़िल-ए-रक़्स में दफ़्न तूफ़ानों से
ख़ौफ़ज़दा होकर लोग सिहर जाते हैं

तन्हाई की गिरफ़्त में हमें छोड़कर
ख़ैर-ख़्वाह आख़िर चले किधर जाते हैं

कश्मकश से सराबोर इस ज़िन्दगी में
नामी जंग-आवर भी सुधर जाते हैं

हर पल ख़ुदा की याद में रहने वाले
सब कुछ बिगाड़कर भी संवर जाते हैं

घर में बुज़ुर्गों की ख़िदमत करने वाले
ना-गुज़ीर-हालात में निखर जाते हैं
- निशांत शुक्ल
7 महीने पहले
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