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चल रहे हैं अब उन्ही रास्तों पे सब

NISHANT SHRIVAS

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल रहे हैं अब उन्ही रास्तों पे सब
        
                                                    
                            
चलने से जिनपे मुझे रोकते थे सब

पेरेशानी में छोड़ के गये हैं जो
खुशियों में लौट आयेंगे सब के सब

इन्साफ के लिए चीखते हुए ये लोग
हादसे में चुप  खड़े हुए थे सब

खुद की मौत पर भीड़ बढ़ाने को
एक दूजे के जनाजे में जाते हैं सब

हंसने के बाद रोने लगता हूँ में
उसको छोड़ के मुझे मिल गया सब

 
2 महीने पहले
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