चल रहे हैं अब उन्ही रास्तों पे सब
चलने से जिनपे मुझे रोकते थे सब
पेरेशानी में छोड़ के गये हैं जो
खुशियों में लौट आयेंगे सब के सब
इन्साफ के लिए चीखते हुए ये लोग
हादसे में चुप खड़े हुए थे सब
खुद की मौत पर भीड़ बढ़ाने को
एक दूजे के जनाजे में जाते हैं सब
हंसने के बाद रोने लगता हूँ में
उसको छोड़ के मुझे मिल गया सब
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