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माँ का घर

Nisha Devi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            माँ का घर
        
                                                    
                            

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

प्यार भरा कण-कण में सारा।
माता-पिता का जहाँ लाड प्यारा,
भाई-बहन का दुलार न्यारा।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

नटखट बचपन जहाँ है बीता।
सुंदर भविष्य का सपना देखा,
मजा-खुशी जहाँ हंसी-ठिठोली।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

चाचा, बुआ,और दादा-दादी।
मामा, मौसी,और नाना-नानी,
रिश्तों में बेशुमार प्यार था।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

अपना-पराया जहाँ कभी नहीं था।
सुख-दुख भी न कभी अलग था,
खाना-कपड़ा भी न कभी अलग था।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .
,
सखी-पड़ोसी संग मेला-सिनेमा देखा।
खेल-खिलौने संग झगड़ा देखा,
पर मन में कभी कोई बैर ना देखा।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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