आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

माँ का घर

                
                                                         
                            माँ का घर
                                                                 
                            

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

प्यार भरा कण-कण में सारा।
माता-पिता का जहाँ लाड प्यारा,
भाई-बहन का दुलार न्यारा।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

नटखट बचपन जहाँ है बीता।
सुंदर भविष्य का सपना देखा,
मजा-खुशी जहाँ हंसी-ठिठोली।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

चाचा, बुआ,और दादा-दादी।
मामा, मौसी,और नाना-नानी,
रिश्तों में बेशुमार प्यार था।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

अपना-पराया जहाँ कभी नहीं था।
सुख-दुख भी न कभी अलग था,
खाना-कपड़ा भी न कभी अलग था।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .
,
सखी-पड़ोसी संग मेला-सिनेमा देखा।
खेल-खिलौने संग झगड़ा देखा,
पर मन में कभी कोई बैर ना देखा।।

माँ का घर ही सबसे प्यारा… .

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर