बच्चे मन के सच्चे
हर ऑंख के तारे
सबके प्यारे,राजदुलारे।
मन के सच्चे,
प्यार करते सबसे।
फ़ुर्र से उड़ा दें,
उदासियां तुम्हारी।
पल में बिखेर दे
खुशियां सारी।
छल-कपट से
दूर ये, मग्न अपनी
दुनिया में रहते।
नहीं भावना द्वेष की
सबसे मिलकर ये है
रहते। कभी दादा की
लाठी बनते,तो कभी
दादी का चश्मा बनते।
कोई मां की सखी सहेली
तो कोई पापा का यार बनता।
सबके ऑंखो के तारे
मन के सच्चे, दिल से प्यारे।
मुस्कान तुम्हारी सतरंगी
दिखते हर रंगों से प्यारे।
चांद को मामा कहते
सूरज को चाचा,
बिल्ली तुम्हारी मौसी
तो गाय को कहते
गौ माता।
हो आसमां से उतरे
तारे करते बातें प्यारी प्यारी।
हर मलिनता से दूर
स्वच्छ पवित्र बच्चे हमारे।
रोशन हो जहां इनका
चमके आकाश में
बन बुलंद सितारे।