नया साल , नया साल , नया साल ,
हर सुख दुख की परिधान को बदलते हुए वक्त की तहजीब से नई उम्मीद नई मुस्कान लिए कितनी जिंदगी को मोहरा और कितनी जिंदगी को बादशाह बनाते हुए
जीवन और जिंदगी के शतरंज में बाज़ीगर बनकर
आते - जाते रहता है ये नया साल ।
नया साल उम्मीद कि किरण को बिखेरते हुए ,
समय के चक्र में घुम कर ऋतुओं को क्रमबद्ध समेट कर ,
दिशाओं की गुलशन में संस्कृति की गुल खिला कर ,
जिंदगी को संघर्ष की आइने में रूप निखारने के क्रम कितनी जिंदगी को बदसूरत और कितनी जिंदगी को खूबसूरत बना देता है ,
कोई गम की आंसुओं को छिटकर कोर्ई खुशी की आंसू तोलकर एक नई पहचान छोड़ जाता है।
हर जिंदगी को नया साल अच्छा या बुरा कुछ देकर हीं जाता है ,
उसी याद में संघर्ष की आइने में जिंदगी का चेहरा देख - देख कर कोई इतिहास लिख जाता है , कोई इतिहास बन जाता है ,
इसी तरह ,
नया साल हर साल जीवन और जिंदगी के संतरंज में बाज़ीगर बन जाता । ॥
-रेखा भारती