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हमारी हिंदी भाषा

Nirmal Thakur

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शहद से मीठी
        
                                                    
                            
सुरीली कुछ नमकीन
कुछ खट्टी
कुछ चटपटी कुछ तीखी हमारी हिंदी
कड़वी शब्दों में भी होती है मीठी मीठी नमी
मधुर वचन में ये है अमृतवाणी
कूट कूट कर भरा इसमें संस्कार
आचरण इसकी बड़ी निराली
अहंकार में भी छुपा रखी है संस्कार
भटके बिछड़े तो यूं गले लगती
अतिथि को करती अभिनंदन
स्वागत सत्कार में ना रहने देती कोई कसर
अपनी वर्णमाला को पहनाकर
शब्दों अर्थों से करती मोहित
रिश्ता रिश्तेदारों में इसकी बड़ा व्यवहार
छोटा बड़ा को करती कद्र
अपना पराया में होती दर्द
मोतियों जैसे शब्दों में बहती रसधार
इनकी अर्थों में खुलती है प्रेम की द्वार
विश्व की समस्त भाषाओं में से
एक निर्मल पवित्र सर्वोपरि हिंदी हमारी
संस्कृत है इसका उद्गम स्थल
व्याकरण है इसकी रीड की हड्डी
शब्दों अर्थों की सौंदर्य से चमक रही है हिंदी का चेहरा
सभी भाषाओं में से हसीन हिंदी हमारी
है भारत माता की बिंदी । ॥

(रेखा भारती -निर्मल ठाकुर )
(बनासो , हजारीबाग , झारखंड )
3 वर्ष पहले
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