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बेपनाह मोहब्बत

Niranjan Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक अधूरा सपना सा हो तुम
        
                                                    
                            
आंख खुलते ही दूर चले जाते हो तुम
लाख छुपाना चाहूँ पलकों के नीचे 
पानी हो आंसू बनकर निकल जाते हो तुम

कल तेरी परछाई में
खुद को देखा करता था
आज यह परछाई मेरी है
इस पर भी शक करता हूं

मेरी हर खुशी मेरी हर हंसी
तेरे ही नाम करता हूं
जिंदगी का ख्वाब दिखाया था तुमने
वह जिंदगी भी तेरे नाम करता हूं

तू न सही तेरी तस्वीर से
बातें तो कर लिया करता हूँ
तुम मेरी जिंदगी में ना सही
तेरी तस्वीर से बेपनाह मोहब्बत तो करता हूं

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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