प्राणी कर ले शिव का वंदन ।
जीवन महकेगा जस चंदन ।।
सुर सरगम में रुद्र बसाना ।
चरणों में नित ध्यान लगाना ।।
सार्थक कर लो अपना जीवन ।
मत घोलो इसमें बहशीपन ।।
शिव शिव रटना बड़ा सुहाता ।
मानव मन को देख लुभाता ।।
माटी का तन हुआ पुराना ।
जीवन सरगम राग सुनाना ।।
मुख से जब तू राम भजेगा ।
मधु सरगम का तान बजेगा ।।
मन का सरगम जब हो चंचल ।
जैसे धारा बहती अंचल ।।
दिव्यक सरगम गीत सुनाती ।
गाकर प्रीतम रोज बुलाती।।
कल - कल झरना गीत सुनावे ।
सरगम वाला तान लुभावे ।।
जैसे शिव का होता वंदन ।
देखे सब ही देव निकंदन ।।
-नीलम अग्रवाल "रत्न"