आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सार्थक कर लो अपना जीवन

                
                                                         
                            प्राणी कर ले शिव का वंदन ।
                                                                 
                            
जीवन महकेगा जस चंदन ।।
सुर सरगम में रुद्र बसाना ।
चरणों में नित ध्यान लगाना ।।

सार्थक कर लो अपना जीवन ।
मत घोलो इसमें बहशीपन ।।
शिव शिव रटना बड़ा सुहाता ।
मानव मन को देख लुभाता ।।

माटी का तन हुआ पुराना ।
जीवन सरगम राग सुनाना ।।
मुख से जब तू राम भजेगा ।
मधु सरगम का तान बजेगा ।।

मन का सरगम जब हो चंचल ।
जैसे धारा बहती अंचल ।।
दिव्यक सरगम गीत सुनाती ।
गाकर प्रीतम रोज बुलाती।।

कल - कल झरना गीत सुनावे ।
सरगम वाला तान लुभावे ।।
जैसे शिव का होता वंदन ।
देखे सब ही देव निकंदन ।।
-नीलम अग्रवाल "रत्न"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर