विज्ञापन

बड़ी तैयारी कर रहा हूँ मैं

Nikhil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बड़ी तैयारी कर रहा हूँ मैं,
        
                                                    
                            
इसलिए तो रोज़ थोड़ा-थोड़ा अपने शौक को मार रहा हूँ।
सड़क पर आँखें बंद करके चलता हूँ - 
ताकि कुछ दिखे ना, कोई मिले ना।
रोज़ वही सुबह उठना, एक गिलास गरम पानी
और बैग लेके क्लास को जाना,
मानो ज़िन्दगी सिर्फ कट रही है।
मेरी तैयारी पत्थर को पानी बनाने की है - 
जब भी मैं असमर्थ लगने लगता हूँ,
तो फिर ये दोहराता हूँ,
मानव जब जोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है - 
ये कह कर फ़िर अपना ज़ोर लगाता हूँ,
“पत्थर को पानी बनाने को मैं रोज़ दौड़ लगाता हूँ”- 
 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10619 कविताएं

View Profile

Shailendra Bhatnagar

369 कविताएं

View Profile

Ravi shankar Sah

49 कविताएं

View Profile