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आओ, लौट चलें आँगन में...

Nikhil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहले चटाई बिछती थी आँगन में,
        
                                                    
                            
अब कुर्सियाँ लगाई जाती है,
गोल बैठ चेहरा देख बातें किया करते थे,
अब सब आगे-पीछे बैठा करते हैं,
जहाँ दादी माथा सहलाकर,
राजा-रानी के किस्से सुनाया करती थी!
अब बच्चे कार्टून की दुनिया में खोकर, मग्न रहा करते हैं
जहाँ 'राजा बेटा' बोल के खाना खिलाया जाता था,
अब फोन दिखाकर बच्चों को खाना खिलाया जाता है।
दादा हमारे 70 में कम रोशनी में अखबार पढ़ा करते थे,
अब 7 की उम्र में बच्चों को चश्मा लगा करता है,
30 सेकंड की वीडियो की कोई नहीं है आभा,
छोड़ो फोन-रील्स को, सब लौट आओ आँगन में,
चेहरा देख हँस के सब बात करें आँगन में...
तुम्हारे कार्टून से कहीं ज्यादा अनमोल कहानी दादी-नानी की...
आओ लौटें आँगन में, दिनों बाद बातें करेंगे...
चेहरा देख हँस के कुछ बातें करेंगे...
 
एक घंटा पहले
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