हास्य कविता : कटी हुई नाक.....
प्रिय तुम ने माथे पर
सिंदूर मेरा भर लिया
मगर बच्चा अपना, पैदा
किसी और से कर लिया
क्यों मुझे दोनों पैरों
के धूल चटा दिया ?
तुमने तो समाज में मेरा
नाक ही कटा दिया
हे प्रिय अब जाऊं भी
तो कहां जाऊं ?
ये कटी हुई नाक किस
किस से छिपाऊं ?
ये कटी हुई नाक किस
किस से छिपाऊं.......?