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हास्य कविता : कटी हुई नाक....

                
                                                         
                            हास्य कविता : कटी हुई नाक.....
                                                                 
                            
प्रिय तुम ने माथे पर
सिंदूर मेरा भर लिया
मगर बच्चा अपना, पैदा
किसी और से कर लिया

क्यों मुझे दोनों पैरों
के धूल चटा दिया ?
तुमने तो समाज में मेरा
नाक ही कटा दिया

हे प्रिय अब जाऊं भी
तो कहां जाऊं ?
ये कटी हुई नाक किस
किस से छिपाऊं ?
ये कटी हुई नाक किस
किस से छिपाऊं.......?

 
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3 महीने पहले

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