माँ की ममता तो निशब्द है।
माँ तो माँ हैं।
साहब वो अनपढ़ जरूर है।
पर
हम सबको वो पढ़ा लेती है।
और तो और
हम सबको पढ़ भी लेती है।
माँ की ममता
का हम सबको वो सुरूर है।
जो दुनिया
की हर माँ में रहता जरूर है।
इसलिए हमे हमारी
माँ पर, हम सबको गुरूर हैं।
मै जब अपना खाना खाता हूँ।
तो
माँ मेरे खाने के बाद खाती है।
और
रात को, जब मैं सो जाता हूँ।
तो
माँ, मेरे सोने के बाद सोती है।
पर
जब मै सुबह ज्योहीं जगता हूँ।
तो
माँ मुझसे पहले जग जाती है।
माँ के हृदय
से स्नेह की वो धारा बहती है।
जो
संसार के सारे दुख सहकर
सहर्ष वो स्वीकार कर लेती हैं।
बस हर माँ
की यही तो विशेषता होती है।
जो पूरी दुनिया भी
उनके आगे, निशब्द होती है।
(कलम बोलती हैं।)
नेमाराम - बरना