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इस त्योहार में आप और हम भी हैं,

Neetu Saini

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गाँव-गाँव, गली-गली, छाई हुई हरियाली है,
        
                                                    
                            
कोई करता बड़ाई, तो कोई देता गाली है।
अब त्योहार लोकतंत्र का आया है,
परिणाम में इसके, दुख और खुशहाली है।

यह त्योहार, इस कदर आया है,
साथ में अपने, सर्दी भी लाया है।
कोई पक्ष, तो कोई विपक्ष में,
तो किसी ने, नोटा अपनाया है।

इसी समय, उम्मीदवार के सहयोगी आते हैं,
घर-घर आकर, न्योता सा दे जाते हैं।
जगह-जगह पोस्टर व प्रचार से,
वो जनता को, अपनी तरफ उकसाते हैं।

कोई निर्दलीय, तो कोई पार्टी से आते हैं,
जनता के बीच में, वो बैठकर बतलाते हैं।
लोकतंत्र के इस त्योहार में,
वो अपनी भागीदारी निभाते हैं।

इस त्योहार में आप और हम भी हैं,
इसके परिणाम में, खुशियाँ और गम भी हैं।
लोकतंत्र की खुशियाँ, सब तरफ हैं,
कहीं ज्यादा, तो कहीं कम भी हैं।
-विकास सैनी
 
22 घंटे पहले
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