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वो रातें

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            के वो खामोश पथ और तेज हवाएं
        
                                                    
                            
कड़कती बिजलियां सावन की बरसात थी
ना जाने वो कौन सी रात थी

ना आँखों में चैन ना दिल को करार
उन दिनों की किया बात थी
ना जाने वो कौन सी रात थी

मैं फिरता अकेला रातों का राजा
और कोई नहीं बस रानी मेरे साथ थी
ना जाने वो कौन सी रात थी

कभी खुशियों का सरगम,तो आज गम का मेला भी
मेरी तन्हाइयों से निकली कोई बारात थी
ना जाने वो कौन सी रात थी


मैं ना हारा कभी था अंधेरों का सिकंदर
तब बाजी मेरे हाथ थी
ना जाने वो कौन सी रात थी
-नीटू मावी
2 महीने पहले
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