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समय की रेत

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पल पल समय यूं व्यर्थ ना कर
        
                                                    
                            
कुछ पुनः कमा ले रे पापी
समय निकल जाएगा एक दिन
बंद रेत की मुठ्ठी भांति

तू कल भी था तू आज भी है
क्या पता तू कल ना हो
तू ये पल था तू वो पल था
क्या पता तू उस पल ना हो

कुछ तो विशेष रहा होगा
जो जन्म मनुज का पाया है
इतना स्वार्थी ना हो वंदे
ये झूठी जग मोह माया है,
-नीटू मावी
3 महीने पहले
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