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समय की रेत

                
                                                         
                            पल पल समय यूं व्यर्थ ना कर
                                                                 
                            
कुछ पुनः कमा ले रे पापी
समय निकल जाएगा एक दिन
बंद रेत की मुठ्ठी भांति

तू कल भी था तू आज भी है
क्या पता तू कल ना हो
तू ये पल था तू वो पल था
क्या पता तू उस पल ना हो

कुछ तो विशेष रहा होगा
जो जन्म मनुज का पाया है
इतना स्वार्थी ना हो वंदे
ये झूठी जग मोह माया है,
-नीटू मावी
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3 महीने पहले

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