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मैं दर्पण ना छोड़ूँ, ना दर्पण मुझे,

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कि अब के बरस चेहरे पर नूर आया है,
        
                                                    
                            
ये मौसम भी जैसे कोहिनूर आया है।

सोचता हूँ कोई बैठा हो,मेरे इंतज़ार में,
लेकर संदेसा, मौसम ज़रूर आया है।

मन में उमंग, उठे दिल में हिलोरे,
पहली बार जवानी पर सुरूर आया है।

अदाओं को बिखेर, उड़ने दे ज़ुल्फ़ें,
नाचो रे मोरा,मेघा हुज़ूर आया है।

अति सुंदर हूँ मैं, ना दुनिया में कोई,
बुद्धि में आज ये फ़ितूर आया है।

मैं दर्पण ना छोड़ूँ, ना दर्पण मुझे,
लगता है चेहरे पर गुरूर आया है।
-नीटू मावी
एक महीने पहले
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