विज्ञापन

अधूरा सफ़र

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            के कितने पतझड़ कितने मौसम
        
                                                    
                            
कितने रंग सुहाने देखे

कितने मरते कितने हंसते
कितने संग सयाने देखे

ना देखी चाहत कोई फलक
वषों रोए दीवाने देखे

झूठी कसमें झूठे वादे
झूठे लिखे अफसाने देखे

झूठे यार झूठे प्यार
झूठे लोग जमाने देखे

ना देखी ऐसी कोई मोहब्बत
कब्र तक ना याराने देखे

तन भी छुटे मन भी छुटे
छुटे शहर पुराने देखे

घर भी छुटे गांव भी छुटे
छुटे महल कुंवारे देखे
-नीटू मावी
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all