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अधूरा सफ़र

                
                                                         
                            के कितने पतझड़ कितने मौसम
                                                                 
                            
कितने रंग सुहाने देखे

कितने मरते कितने हंसते
कितने संग सयाने देखे

ना देखी चाहत कोई फलक
वषों रोए दीवाने देखे

झूठी कसमें झूठे वादे
झूठे लिखे अफसाने देखे

झूठे यार झूठे प्यार
झूठे लोग जमाने देखे

ना देखी ऐसी कोई मोहब्बत
कब्र तक ना याराने देखे

तन भी छुटे मन भी छुटे
छुटे शहर पुराने देखे

घर भी छुटे गांव भी छुटे
छुटे महल कुंवारे देखे
-नीटू मावी
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3 महीने पहले

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