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ना जाने जोर ना लगता बाहें,झटक सी गई है

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बस यूं समझो के ज़िंदगी, लटक सी गई है
        
                                                    
                            
इधर के ना उधर के बीच में,अटक सी गई है

एक दरिया सा है मावी,जो बहा कर ले गया
सब कुछ जानते हुए भी राहें,भटक सी गई है

ऐसा नहीं है के हमे बिल्कुल तैरना नहीं आता
ना जाने जोर ना लगता बाहें,झटक सी गई है

ज़िन्दगी रूठी रही साथ,तक़दीर का भी न था
मन शांत सा रहता है तबियत,पटक सी गई है
-नीटू मावी
21 घंटे पहले
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