विज्ञापन

बदलती दुनिया

neetu Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            लगता है नदियों के किनारे बदल गए
        
                                                    
                            
देखने का फर्क है या नज़ारे बदल गए

लहरें भी शांत है और कश्ती भी चुप
हवाएं बदली है या सहारे भी बदल गए

मुझ से कहती है घर की खामोश दीवारें
दुशमन ही बदले है या प्यारे भी बदल गए

ना डगर की खबर ना मंज़िल का पता
राहें ही बदली है या दुआरे भी बदल गए

अब ना छांव है दूर तक ना डेरा है कोई
कबिले ही बदले है या बंजारे भी बदल गए
-नीटू मावी
17 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Updesh Kumar

12614 कविताएं

View Profile

Nathuram Kaswan

8654 कविताएं

View Profile

User

29 कविताएं

View Profile

Jeewan Singh

97 कविताएं

View Profile