लगता है नदियों के किनारे बदल गए
देखने का फर्क है या नज़ारे बदल गए
लहरें भी शांत है और कश्ती भी चुप
हवाएं बदली है या सहारे भी बदल गए
मुझ से कहती है घर की खामोश दीवारें
दुशमन ही बदले है या प्यारे भी बदल गए
ना डगर की खबर ना मंज़िल का पता
राहें ही बदली है या दुआरे भी बदल गए
अब ना छांव है दूर तक ना डेरा है कोई
कबिले ही बदले है या बंजारे भी बदल गए
-नीटू मावी
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