विज्ञापन

नीति के दोहे मुक्तक

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काला होय धंधा धन, दोनों रहते गोय।
        
                                                    
                            
जीवन सदा सुखी रहे, सत्ता कंधा होय।।

कवि : अशर्फी लाल मिश्र ,अकबरपुर ,कानपुर।
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Dn Chaubey

7108 कविताएं

View Profile