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नीति के दोहे मुक्तक

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दिन बीते रात बीते, पल पल बीता जाय।
        
                                                    
                            
जनहित में कुछ क्षण लगें,जीवन सफल कहाय।।

- अशर्फी लाल मिश्र, अकबरपुर, कानपुर 
 
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
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Jyoti Agarwalla

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