विज्ञापन

वो सच बचा नहीं है।

Neet Biology

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अब वो सच बचा नहीं है।
        
                                                    
                            
जिसे झूठ ने रचा नहीं है।
ख़ामोश आहट है उसकी,
कोहराम जो मचा नहीं है।
भटके मुद्दे,लावारिस चर्चा
ये टीवी हमे जचा नहीं है।
नाराज फूफा, कुर्सी मांगे,
खाया है वो पचा नहीं है।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all