पहले बाप , फिर बाप का बाप , बाप रे बाप।
केटली मे भरी ये नफ़रती भाप , बाप रे बाप।
सब मिलकर एक गाली तय क्यो नही करते,
कभी चूहा बोलते हो कभी सांप, बाप रे बाप।
ये मायूसी, बेज़ारी, नाउम्मीदी और महरूमी ,
लंबी फेहरिस्त के है पुराने पाप , बाप रे बाप।
ये गुजरात का दरिया है और तैर के जाना है ,
बपौती के किस्से हो रहे फ्लॉप , बाप रे बाप।
बाप का बाप भी जायेगा, ऐसा जो बोल गये,
खुद वो ढूंढ रहे अपने माई बाप, बाप रे बाप।
- जयंत दिक्षित