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याद आते हैं

Neelam Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आज भी मेरे टूटे हुए सपने याद आते हैं।
        
                                                    
                            
अश्क ऑखों से यूं ही निकल जाते हैं।
आज
हौसला उड़ने का बाकी बस जह़न में है।
दरद का क्या है ये ऑखों से छलक जाते हैं।
आज भी
हर कसक बाकी है उम्रभर रहेगी शायद।
टूटते तारे के जैसे निकल आते हैं।
आज भी
मेहरबानियॉ कुछ लोगो ने की थी मुझ पर।
आहसान के शब्दों में आज भी जता जाते हैं।
आज भी
जिन्हे सर ऑखों पे बिठाया था हमने।
वो लोग ही अक्सर रूला जाते हैं।।   


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले
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