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कान्हा की बांसुरी

Neelam Dayal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कान्हा की बांसुरी के तीन गुण
        
                                                    
                            
कान्हा की बांसुरी हमें हमको सिखाएं
बांसुरी में कोई गांठ नहीं होती, अपने मन में तुम कोई गांठ न रखो
यह गांठ यह गांठ( बदले की भावना) मन को जलाती है
कान्हा की बांसुरी बिना बजाई नहीं बजती है
हमको यह सिखाती है नहीं जरूरत मत बोलो जब बांसुरी बजती है कान्हा की
मधुर ही बजती है सबके मन को भाती है
जब भी मुख खोलो भाई बहनों मीठा ही बोलो
एक महीने पहले
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