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आखिरी पड़ाव

Neelam Dayal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मेरे जाने से पहले पहले एक बार मुझसे मिलते जाना
        
                                                    
                            
एक बार गले से लग जाना बस इतनी सी चाहत है
इसको पूरी कर जाना मैं कुछ बोलू तुम सुन जाना
कुछ देर को तुम चुप हो जाना
मेरे मन को यकीन यह हो जाए
कोई तो मेरा था अपना
नहीं चाहिए कसमे वादे
इस उम्र के लिए जाते-जाते
इतना तो तुम कर जाना
मैं खुद समझने की और तुम्हें समझाने की अदा समझ रही
इसलिए तो तुमसे नहीं कोई वादा कर रही
मैं तुमसे कह देती तुम समझ लेते
यह बात भी कहने का साहस नहीं हो पाया
घुंघरू की तरह बिखरती गई,
मेरे जाने से पहले एक बार मुझसे मिलते जाना
एक ही घर में रहते रहते, मिले हुए बीत जाते हैं बरसों
लगता है बात हुई हो कल परसों
उम्र के इस दोराहे पर ,
आकर खड़ी हो गई हूं
कैसे रिश्तो को समझाऊं अपनों को मनाऊं
छोड़ कर जा रही हूं ,थक चुके हैं कदम
सोचती हूं कुछ हौसला मिल जाता
टूटे हुए इंसान को ,
कोई तो समझ पाता
अब ना समय है
ना उम्र है
ना फासले
ना काफिले है
ना रास्ते हैं
अब बस खत्म होने वाली है लंबी चुप्पी
मेरे जाने से पहले एक बार मुझसे मिलते जाना
5 घंटे पहले
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