विज्ञापन

वापस मत जाना

Neelam Chourasia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वापस मत जाना
        
                                                    
                            

सच और झूठ की ये कैसी लड़ाई है,
हमारी-तुम्हारी ये कैसी रुसवाई है।
सच जो हम स्वीकार नहीं कर पा रहे,
झूठ कहकर मन को बार-बार रोने से मना कर रहे।
तुम आओगी,
ये झूठ कई बार बोल रहे हैं,
पर सच सिर्फ़ तुम जानती हो—
क्या तुम आओगी या नहीं?
क्या तुम मुझे फ़ोन करोगी या फिर नहीं?
हम झूठ में नहीं जीना चाहते,
हम सच को मानकर जीना चाहते हैं
कि तुम अब इस वक़्त बनारस में नहीं हो।
मैं बस इतना कहना चाहता हूँ—
अबकी आना,
तो वापस मत जाना।
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8777 कविताएं

View Profile

Aradhana Verma

252 कविताएं

View Profile

1 कविता

View Profile

1 कविता

View Profile