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शायरी

Neelam Chourasia

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
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मेरा ख़्याल रखो,
मेरे बाद रखो,
मेरे पहले रखो।

तुम्हारे में मैं ज़िंदा रह गया,
ये ख़्याल मेरे सिरहाने रह गया।

कायर कह गई तुम,
घायल कर गई तुम,
हुस्न का अपने तुम शायर,
कर गई तुम।

तुम ख़ास हो,
तुम आस हो,
तुम पास हो,
तुम मीठा-सा एहसास हो।

तुम्हारा पास आना,
तुम्हारा मुझमें समाना,
फिर दूर जाना,
फिर मुझसे बात न करना,
मुझे बहुत खलता है।

मधुशाला पीने के मौसम में,
हम बस पानी पी रहे हैं।
तुम मेरी हों ये सोचकर,
हम कहानी लिख रहे हैं।

 
14 घंटे पहले
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