मैं बताता हूं क्या हो तुम....
ओ मेरी जां मेरी जां हो तुम
जो किसी नज़र ने देखी नहीं
ऐसी दिलकश़ अदा हो तुम
बहती रहती हो ज़िन्दगी बनकर
हां सचमे जाना हवा हो तुम
बंद आंखों से तुम्हीं दिखे हो
ख़्वाब अभी नया नया हो तुम
तुम्हें सोचकर सुकूं मिले है
मेरे मर्ज़ की दवा हो तुम
अपने अक्स में तुम्हें देखता हूं
जैसे मेरा ही आईना हो तुम
तुमसा जहां में कोई नहीं है
सबसे जाना जुदा हो तुम
मुझे भी खुशियां नसीब हो
जो कह दो तुम के मेरा हो तुम
तेरे बिन ग़ज़ल अधूरी है मेरी
मेरी ग़ज़लों का मतला हो तुम
मुझमें मैं तो थोड़ा भी नहीं
मुझमें सारा का सारा हो तुम
ये दुनिया तुमसे वाक़िफ़ नहीं
बस इतना पता है, नेहा हो तुम।
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