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बैठकर मैं तलाशें यहीं पर तुझे

Navneet Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बैठकर मैं तलाशें यहीं पर तुझे
        
                                                    
                            
क्या पता तू मुझे छोड़कर बढ़ गया ।
मैं तो बस राह तेरी ही तकता रहा
तू अकेले ही सब सीढ़ियां चढ़ गया ।।
बैठकर मैं तलाशें यहीं पर तुझे..........
सादगी से था चेहरा भरा जो तेरा,
मैं तो थोड़ा सा भी उसको पढ़ ना सका ।
तूने मुझको सिखाई जो अठखेलियां,
फिर ना जाने तू मुझमें यूं क्या पढ़ गया ॥

बैठकर मैं तलाशें यहीं पर तुझे............
मैं तो बस राह तेरी ही तकता रहा.........

राही बनके जो फिरते थे सारा जहां,
आज मैं हूं यहां और तू है वहां ।
साथ चलके भी थकते नहीं थे कभी,
आज मुझको अकेले तू. कर् जड़ गया ।
बैठकर मै तलाशें यहीं पर तुझे..........
मैं तो बस राह तेरी ही तकता रहा........
 
2 महीने पहले
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