आपको और हमको यह पता ही कहाँ है मलूम ही कब है
के राजे-मुस्तक़बिल हमारा यौमिया-मामूल में ही जज़्ब है!
हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने से क़िस्मत नहीं पलटती बशर
मेहनतकशों का ही नसीब चमता है उनके साथ ही रब है!
-एन. आर. कस्वाँ