प्यसा येह किरदार मेरी कहानी से नहीं
बुझेगी तिश्नगी इस की पानी से नहीं!
कश्ती पे आती लहरें नशेब-ओ-फ़राज़'
वाबस्ता ये दरिया की रवानी से नहीं!
-एन. आर. कस्वाँ