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आपको और हम को पता ही कहाँ है मालूम ही कब है

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आपको और हम को पता ही कहाँ है मालूम ही कब है
        
                                                    
                            
राजे-मुस्तक़बिल हमारा यौमिया-मामूल में ही जज़्ब है!
तयशुदा मंज़िल-ए-मक़्सूद सबकी एक है मग़र फिरभी
न जाने क्यूँ जुदा- जुदा तख़य्युल में जी रहे हम-सब हैं!
-एन. आर. कस्वाँ
एक घंटा पहले
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