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सराबो मिराज़

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नासमझी में इन्सान सराबो मिराज़ के पीछे पीछे दौड़ता है
        
                                                    
                            
समझ आने पर वह सबसे पहले अपना दृष्टिभ्रम तोड़ता है
सुकून-ए-क़ल्ब की जुस्तजू में रिंदों से है रौनक मयकदे की
नींद खुलने पर ही हर ख्व़ाब हक़ीक़त का साथ छोडता है
-एन आर कस्वाँ
3 महीने पहले
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