नासमझी में इन्सान सराबो मिराज़ के पीछे पीछे दौड़ता है
समझ आने पर वह सबसे पहले अपना दृष्टिभ्रम तोड़ता है
सुकून-ए-क़ल्ब की जुस्तजू में रिंदों से है रौनक मयकदे की
नींद खुलने पर ही हर ख्व़ाब हक़ीक़त का साथ छोडता है
-एन आर कस्वाँ