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रुतों के उपहार

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वक़्त है मुक़र्रर हर-सूरत हर-हालात हर-शय के इंतज़ार का
        
                                                    
                            
फूलों के कुचलने से रुक ना सकेगा आना मौसमे-बहार का
हरसू बेसबब वक़्त यूँ अपना तकरार ही में न जाया कीजिए
लुत्फ़ जमकर लीजिए हरवक़्त हरजगह रुतों के उपहार का
-एन आर कस्वाँ
3 महीने पहले
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