वक़्त है मुक़र्रर हर-सूरत हर-हालात हर-शय के इंतज़ार का
फूलों के कुचलने से रुक ना सकेगा आना मौसमे-बहार का
हरसू बेसबब वक़्त यूँ अपना तकरार ही में न जाया कीजिए
लुत्फ़ जमकर लीजिए हरवक़्त हरजगह रुतों के उपहार का
-एन आर कस्वाँ
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