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पेच-ओ-ख़म

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जो है उस को कम ढूंढते हैं
        
                                                    
                            
नहीं है उसको हम ढूंढ़ते हैं!

हमारे अन्दर सुकून भरा है
पर हम बाहर ग़म ढूंढ़ते हैं!

सरल और सहल है जीवन
हम पेच-ओ -ख़म ढूंढ़ते हैं!
-एन. आर. कस्वाँ
 
एक महीने पहले
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