परवाज़ आस्मान की आबो-दाना ज़मीन का खाता है
येह परिन्दा हर-रोज फ़लक तक क्या लेने को जाता है!
गगन में करता है गमन बे-ख़ौफ़ वापस लौट आता है
बातें अंबरकी धरतीपे धरतीकी अंबरमें किसे बताता है!
-एन. आर. कस्वाँ