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परिन्दा

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            परवाज़ आस्मान की आबो-दाना ज़मीन का खाता है
        
                                                    
                            
येह परिन्दा हर-रोज फ़लक तक क्या लेने को जाता है!
गगन में करता है गमन बे-ख़ौफ़ वापस लौट आता है
बातें अंबरकी धरतीपे धरतीकी अंबरमें किसे बताता है!
-एन. आर. कस्वाँ
एक घंटा पहले
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