विज्ञापन

नींद खुलती है

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हालात सुधर जाते हैं इन्कलाब के बाद
        
                                                    
                            
ज़मीनें ज़रख़ेज़ होती हैं सैलाब के बाद

दिखाई देते थे मंज़र अज़ीब सोते हुए
नींद खुलती है इन्सां की ख्व़ाब के बाद

येह इंतज़ार की घड़ी होती है बेचैन बड़ी
क़रार आ ही जाता है इज़्तिराब के बाद
-एन आर कस्वाँ
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all