हालात सुधर जाते हैं इन्कलाब के बाद
ज़मीनें ज़रख़ेज़ होती हैं सैलाब के बाद
दिखाई देते थे मंज़र अज़ीब सोते हुए
नींद खुलती है इन्सां की ख्व़ाब के बाद
येह इंतज़ार की घड़ी होती है बेचैन बड़ी
क़रार आ ही जाता है इज़्तिराब के बाद
-एन आर कस्वाँ
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