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मंज़िल-ए-मक़्सूद

Nathuram Kaswan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िन्दगी के इम्तिहान बाक़ी हैं हम में भी जान बाक़ी है
        
                                                    
                            
चल मुसाफ़िर मंजिले-मक़्सूद से अभी पहचान बाक़ी है
-एन. आर. कस्वाँ
एक दिन पहले
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